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  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi
    • Posted on May 14

    कभी,
    कविताओं से
    था नहीं नाता मेरा ;
    घनश्याम बैरागी का.
    कभी,
    मिज़ाज
    शायरी का था ही नहीं ;
    मैं घनश्याम वैष्णव था.
    एक बैरागी बालकवि,
    जिनके "दो टुक"
    "गौरव गीत" "दरद दिवानी"
    "भावी रक्षक देश के"
    ऐसा गुंजन गीत,
    तू चंदा मैं चांदनी...
    कर गई मुझे दीवानी,
    बन गया मैं कवि ;
    और शायर जागरण का.
    आज,
    फिर याद आ गये ;
    बालकवि बैरागी का.
    *****************
    विन्रम आदरान्जली
    *****************
    अखिल भारतीय
    वैष्णव ब्रा.सेवा संघ मुम्बई के
    संस्थापक सदस्य व संरक्षक
    राष्ट्रीय कवि, वरिष्ठ राजनेता
    पुर्व मंत्री मप्र शासन,
    पुर्व सांसद, पुर्व राज्यसभा सद्स्य
    श्रद्वेय आदरणीय दादाश्री
    बालकविजी बैरागी सा.
    88 वर्ष का आज मनासा में
    श्री चरणो मे लीन हो गये.
    ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें.
    मालवा माटी के सपूत
    और ख्यात साहित्यकार
    समाज गौरव बालकवि बैरागी.
    वैष्णव बैरागी समाज के
    एक युग का अन्त हो गया.
    कभी भी जिन्होंने,
    किसी भी समाजजन या गरीब व्यक्ति की
    मदद के लिए हर समय तेयार रहते थे
    उनका जीवन सादगी कि मिसाल थी.
    नंदरामदास उनका नाम था
    पर बालकविजी बैरागी
    राजनीति, साहित्य एवं कृषिकर्म,
    हिन्दी काव्य- मंचों पर लोकप्रिय रहे.
    बालकविजी बैरागी की
    राजनैतिक यात्रा अपने दम पर रही.
    दो बार विधायक और
    मध्यप्रदेश शासन में मंत्री पद.
    लोकसभा और राज्यसभा में सदस्य.
    कई संसदीय समितियों में सलाहकार
    और हिंदी के साथ
    भारतीय भाषाओं की लड़ाई लडऩे वाले
    भाषा प्रेमी.
    पर नैतिक मूल्यों और पार्टी के प्रति प्रतिबद्धता के सदाबहार रही.
    साहित्य में न कभी राजनीति की,
    ना उसका साहित्यिक वर्चस्व को उन्होने राजनीति में प्रयोग किया.
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