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    मुसाफिर मैं सफर पर :

  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi
    • Posted on September 26
    मुसाफिर मैं सफर पर :

    चलना तू जिंदगी
    ये तेरा धरम है,
    मुसाफिर
    मैं सफर में ;
    ये मेरा करम है.
    फल की चिंता,
    ना कभी मैने किया.
    बस,
    चलते रहना ;
    ये है मेरा सिफा.
    कभी शिकायत
    किया भी मैने,
    अपने आप में
    जिया भी मैने.
    आज अट्टहास
    करता है दुनिया,
    क्या खोया
    क्या पाया ;
    कहता है दुनिया.
    जिंदगी में सबकुछ
    मिलता है कहाँ,
    जिंदगी सफर है
    चलता है दुनिया.
    बस,
    इसी सफर में ;
    हम भी तो हैं चलते.
    चलते चले जाना है,
    मुसाफिर है दुनिया. ।।
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