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    फुर्सत के पल :

  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi
    • Posted on May 6
    फुर्सत के पल :


    फुर्सत,
    कहाँ मिलती है इतनी.
    कि,
    तन्हाइयां समेट लूँ.
    बस,
    जिंदगी हसीं बना लेने की
    इक,
    जज्बा तो है यारों.
    कभी,
    राह पर चलते-चलते
    मिल जाये एक हसीं मंजिल.
    मंजिलें,
    मुकाम तक पहुंचा दे
    तो ;
    बच जायें रुसवाइयों से.
    न तन्हा रहने का गम,
    न कभी हों गुरबत का डर.
    तब कहाँ फुर्सत मिले,
    जब जिंदगी इतनी हसीं हों.
    कि,
    साथी है संग-संग ;
    फिर कहाँ फुर्सत मिले.
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