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    चंचल बगुला शांत :

  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi
    • Posted on May 11
    चंचल बगुला शांत :


    बैठा है एक बगुला,
    कैसे शांत मन !
    कहीं दम्भ ना दिखा रहा.
    शांत मन
    निर्मल ना समझो !
    ऐसा है यह बगुला ?
    चंचल कर दे,
    एक छण जब ;
    कभी आ जाए उपर मछली.
    गया शांत,
    चंचल मन बगुला !
    शांत फिर
    यह बगुला कैसा ?
    चंचल हो खुद,
    कर पानी को ;
    चंचल मछली चोच मारकर.
    ले उड़ता कैसे मछली,
    यह चंचल बगुला !
    कर पानी को भी चंचल ?
    फिर कैसे है,
    यह शांत बगुला.
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