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    आज मिलन की आस :

  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi
    • Posted on April 27
    आज मिलन की आस :


    कल मिलन की
    याद आई थी,
    आज मिलन की आस.
    फिर चली पुरवाई है,
    कल मिलन की ;
    एक बार फिर से बारी है.
    सुगंध ;
    ऐसी फिज़ा में महक उठी.
    जैसे,
    इम्तिहान ;
    फिर से प्रेम की बारी है.
    कल मिलन की याद आई थी,
    आज मिलन की फिर से बारी है.
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