Participating partners:


    आज का सलाम है, हम सभी हैं मजदूर :

  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi
    • Posted on April 30
    आज का सलाम है, हम सभी हैं मजदूर :



    टप-टप चूहता
    पसीना,
    मजदूर का.
    क्योंकि ;
    असली मेहनत,
    ही है ;
    मजदूर का.
    सुबह से...
    हो गई शाम,
    न नींद आई ;
    न ली कोई आराम.
    क्योंकि,
    चलता निरंतर
    मजदूरी का काम.
    हम,
    बने रहें
    सच्चे मजदूर.
    समझे न कोई
    हमें,
    मजबूर.
    जिस दिन
    हो जाता,
    मजदूर मजबूर.
    समझ लो,
    उसी दिन हील जाती ;
    नींव भी हों कितनी मजबूत.
    फल मेहनत का,
    मिले निरंतर बूंद-बूंद.
    तभी न रहेगी
    मजबूरी,
    कहीं भी दूर-दूर ;
    बने रहें सच्चे मजदूर.
    क्योंकि,
    है सिर्फ ;
    मेहनत मजदूर का.
    Post Comments Now
    Comments