Participating partners:


    @ "सेल" के भिलाई इस्पात संयंत्र में समस्याएँ नई नहीं :

  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi
    • Posted on February 19
    @ "सेल" के भिलाई इस्पात संयंत्र में समस्याएँ नई नहीं :


    @ भिलाई इस्पात संयंत्र के,
    उच्च प्रबंधन का रवैया गैर जिम्मेदाराना @
    ***********************************

    भिलाई : 19/फरवरी/2018 -
    भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन के गैर जिम्मेदाराना रवैया से पूरे संयंत्र के अंदर अफरा-तफरी का माहौल पैदा होने की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है |
    पिछले 15 फरवरी 2018 को सेफ्टी समितियों का जिस नाटकीय तरीके से अधिशासी निदेशक संकार्य भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा उनके हस्ताक्षर से जारी किया गया शायद इस तरीके की घटना सुरक्षा या अन्य सांविधिक कमेटियों के गठन के मामले में इसके पहले कभी नहीं हुआ | किंतु परिपत्र जारी होने के चार दिन पश्चात भी विभाग प्रमुखो (फैक्ट्री मेनेजर) तथा सम्बंधित पर्सनल कार्यालय द्वारा इस मामले में अनभिज्ञता जाहिर किया जाना भिलाई इस्पात संयंत्र की कार्यशैली में कई सवालों को जन्म दे रहा है |

    & ऐसे होता है सुरक्षा समितियों का गठन -

    फैक्ट्री नियमों के तहत सुरक्षा समितियों की गठन कर्मियों द्वारा चुने गए कार्मिक साथियों एवं प्रबंधन द्वारा उसी संख्या में अधिकारियों का नाम शामिल कर सुरक्षा समितियों का गठन किया जाता है |
    सदस्यता जांच हेतु श्रम विभाग भारत सरकार द्वारा करवाए गए गुप्त मतदान में बहुमत हासिल कर मान्यता प्राप्त करने वाली यूनियन के द्वारा दिए गए नामों को कर्मियों द्वारा चुने गए प्रतिनिधि के रूप में स्वीकार करना की परिपाटी सेल के अन्य ईकाईयो के सात भिलाई इस्पात संयंत्र में भी रही है |
    इसी परिपाटी का पालन करते हुए पिछले कार्यकाल में मान्यता प्राप्त यूनियन के द्वारा दिए गए नामों को औद्योगिक संबंध विभाग ने उचित कार्यवाही हेतु उप महाप्रबंधक (कार्मिक - संकार्य) के माध्यम से सुरक्षा समितियां गठित किए जाने वाले सभी फैक्ट्रियों के कार्मिक अधिकारी को उचित कार्यवाही हेतु भेजा गया |
    उन फैक्ट्रियों से समान संख्या में अधिकारियों का नाम सम्मिलित करने के पश्चात उस विभाग प्रमुख के हस्ताक्षर से सुरक्षा समितियों का गठन का पत्र जारि किया गया था |

    & मनमानी पर उतर गया है सुरक्षा विभाग -

    पिछले बार कोक ओवन एवं कोल केमिकल विभाग में पी. आर. देशमुख रेल एवं स्ट्रक्चरल विभाग में ए. व्ही. कमलाकर, प्लेट मिल में शर्मा जी, एस.पी.3 में एस भट्टाचार्य, आदि के हस्ताक्षर से सुरक्षा समितियों का परिपत्र जारी किया गया था,एवं इस परिपत्र की प्रतिलिपि अधिशासी निदेशक (संकार्य), महाप्रबंधक सुरक्षा, उप महाप्रबंधक कार्मिक संकार्य एवं वरिष्ठ प्रबंधक आई.आर. को भेजी गयी थी |
    इस बार एकदम अलग प्रक्रिया अपनाकर मनमाने ढंग से विभागों में परिपत्र जारी करे बिना परिपत्र जारी होने की सूचना दी जा रही है |
    ***************************
    रिपोर्ट -
    घनश्याम जी.वैष्णव बैरागी
    =====================


    @ भिलाई इस्पात संयंत्र मेें,
    कर्मियों को रिझाने अफवाहों का बाजार हुआ गर्म @
    *************************************

    भिलाई : 19/फरवरी/2018 -
    गुप्त मतदान द्वारा सदस्यता की जांच कर यूनियन को मान्यता देने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए अभी 4 महीने बचे हुए हैं इसी के मद्देनजर कुछ यूनियने अपने आप को कर्मियों को रिझाने एवं कर्मियों के हक में लड़ते हुए दिखाई देने के लिए तरह-तरह की समाचार अखबारों में प्रकाशित करने में लगी हुई है |
    जिनमें से कई बातें तथ्य से परे महज अफवाहों के अलावा कुछ भी नहीं है |

    & आवास मेंटेनेंस के 6 करोड़ नहीं हुए वापस – प्रबंधन ने कहा :
    विगत दिनों दो तथाकथित ट्रेड यूनियनों ने अखबारों में प्रकाशित करवाया कि पिछले 2 वर्षों में मेंटेनेंस हेतू नगर प्रशासन विभाग को आबंटित बजट लगभग आठ करोड़ रूपये है , एवं नगर प्रशासन विभाग द्वारा आवंटित इस बजट में से 6 करोड़ रुपए वापस कर दिया है |
    श्रमिक संगठन सीटू के प्रतिनिधिमंडल को महाप्रबंधक का प्रभार संभाले हुए उपमहाप्रबंधक (प्रभारी) नगर प्रशासन विभाग ने बताया कि नगर प्रशासन विभाग द्वारा आवंटित बजट का 6 करोड़ रुपए वापस करने का समाचार झूठा एवं अफवाह फैलाने के लिए किया गया है जबकि तथ्य बिल्कुल इस से उलट है |
    वित्त वर्ष 2017 -18 के लिए भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा मेंटेनेंस हेतुआवंटित बजट 31.43 करोड़ रुपए है |

    & ऐसे होता है नगर प्रशासन विभाग में कार्य -

    उच्च प्रबंधन द्वारा उच्च स्तरीय बैठक में अलग-अलग विभागों के लिए बजट आवंटित होता है, इसी के तहत नगर सेवा विभाग के अधीन होने वाले आवास मेंटेनेंस के कार्यों के लिए भी बजट आवंटित किया जाता है | नगर प्रशासन द्वारा कुछ कार्यों को ठेके में देकर करवाया जाता है |
    ऐसे कार्यों हेतु आवंटित बजट को खर्च करने हेतु तैयार किए गए प्लानिंग के मुताबिक टेंडर आमंत्रित करना होता है एवं टेंडर में भाग लिए पार्टियों में से नियम के अनुसार उचित पार्टी को चुनकर काम दिया जाता है | काम के पश्चात काम का जाँच कर बिल पास किया जाता है |

    & ठेकेदार काम छोड़े तो बजट फोरवर्ड -

    कभी कभी वित्तीय वर्ष के आखरी चंद महीनों में आवंटित काम किसी किसी ठेकेदार द्वारा पूरा न कर बीच में ही छोड़ देने की घटना भी सामने में आती है, ऐसी सूरत में उस कार्य के लिए आवंटित बजट को वापस नहीं किया जाता बल्कि अगले वित्त वर्ष के लिए कैरी फॉरवर्ड किया जाता है |
    *********************************
    रिपोर्ट -
    घनश्याम जी.वैष्णव बैरागी
    ==========================
    - 08827676333
    - gbairagi.enews@gmail.com
    =========================
    Post Comments Now
    Comments