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    मई दिवस भिलाई में किया गया श्रमिक शहीदों को याद :

  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi
    • Posted on May 1
    मई दिवस भिलाई में किया गया श्रमिक शहीदों को याद :


    श्रमिक संगठनों ने निकाला मशाल जुलूस :

    भिलाई : भिलाई में आज मई दिवस को सभी श्रमिक संगठनों ने एक साथ मनाया मई दिवस.
    हिंदुस्तान स्टील एंप्लाइज यूनियन ( सीटू ), रायपुर डिवीजन इंश्योरेंस एंप्लाइज यूनियन मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ मेडिकल एवं सेल्स रिप्रजेंटेटिव यूनियन सीटू के साथी संयुक्त रुप से बेरोजगार चौक से 6:30 बजे मशाल जुलूस निकालकर ग्लोब चौक होते हुए सेक्टर 5 का 7 मिलियन टन चौक से वापस बेरोजगार चौक तक आकर एक सभा में तब्दील हो गए.

    आज भी हैं बंधुआ मजदूर -

    सभा को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि आजादी के 70 साल बाद भी देश के अंदर बंधुआ मजदूर वाली स्थिति जारी है.
    इसीलिए 8 घंटे काम के मांग को लेकर जो लड़ाई आज से 132 साल पहले शिकागो से शुरू हुई थी जारी रहेगा क्योंकि मजदूरों की न्यूनतम से न्यूनतम जरूरतों को पूरा ना कर पाने वाली सरकारी जब तक सत्ता में रहेगी तब तक सत्ता परिवर्तन के लिए एवं मजदूरों का राज कायम करने के लिए यह संघर्ष जारी रहेगा.

    दलित शोषण मुक्ति मंच एवं एस एफ आई के साथी आए समर्थन में -

    मशाल जुलूस के दौरान दलित शोषण मुक्ति मंच एवं स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के साथी समर्थन में आए एवं रैली में शामिल साथियों को पानी एवं शरबत पिलाया.
    इन श्रमिक साथियों ने कहा की जब से मोदी सरकार सत्तासीन हुई है तभी से श्रम कानूनों मे लगातार परिवर्तन किया जा रहा है.
    8 घंटे के कार्य दिवस को 12 घंटा करने का जो प्रस्ताव इन्होंने पेश किया था यदि वह लागू होता है तो ना केवल बेरोजगारी की संख्या को बढ़ाएगा बल्कि देश के अंदर अराजकता का माहौल भी पैदा हो जाएगा.

    इससे पुर्व मनाया मई दिवस -

    मई दिवस के अवसर पर श्रमिक यूनियन सीटू ने यूनियन कार्यालय में झंडा फहराने के पश्चात, बोरिया गेट में 8:40 पर झंडा फहराकर भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मियों के बीच मई दिवस 2018 का संदेश दिया.

    हमेशा प्रासंगिक रहेगा मई दिवस -

    इस अवसर पर सीटू नेताओं ने कहा कि आज से 132 साल पहले मजदूरों के जायज हक सीमित काम के घंटे अर्थात 8 घंटे कार्य दिवस की मांग को लेकर अमेरिका के शिकागो शहर के हे मार्केट से शुरू हुआ Andolan पूरे विश्व के अंदर तेजी से फैला एवं मजदूरों के जायज है.
    यह इसी हे के लिए संघर्ष है, तेज होने लगी लंबी लड़ाई के बाद आखिर कर मजदूरों ने कार्य दिवस को 8 घंटा कराने में कामयाब हुए, किंतु आज जब भी पूंजीवाद को सर उठाने का मौका मिलता है वह मजदूरों के कार्य दिवस को 8 घंटे से बढ़ाकर ना केवल 12 घंटा करना चाहता है.
    बल्कि मजदूरों के अधिकारों को भी समाप्त करने के लिए हरसंभव जुगत लगाता रहता है या स्थिति आज हमारे देश के अंदर केंद्र में काबिज भाजपा-नीत मोदी सरकार अपने कॉरपोरेट मित्रों को खुश करने के लिए करने का भरपूर प्रयास कर रही है.
    ऐसे में मई दिवस उसकी परंपराएं एवं उसके संघर्ष की प्रासंगिकता और ज्यादा बढ़ जाती है.

    जारी रहेगा संघर्ष -

    मई दिवस केवल 8 घंटे कार्य दिवस की मांग मत के लिए नहीं जाना जाता बल्कि यह आंदोलन पूरे विश्व के अंदर पूंजीवादी.
    सामंतवादी एवं साम्राज्यवादी सरकारों से मुक्ति के लिए जनता को लामबंद करने तथा अंतरराष्ट्रीय एकजुटता सभी वयस्कों के लिए मताधिकार युद्ध के खिलाफ युद्ध साम्राज्यवादी उपनिवेशिक शासन से मुक्ति मजदूरों को सड़क पर उतरने का अधिकार राजनीतिक संगठन बनाने का अधिकार अभी राजनीतिक मांगो एवं इन मांगों के लिए खोए संघर्षों के लिए भी जाना जाता है.
    जब तक हमारे देश सहित पूरे विश्व के अंदर शोषण की व्यवस्था जारी रहेगी तब तक शोषण के खिलाफ संघर्ष भी जारी रहेगा.

    1 मई 1923 से भारत में मनाया जाता है मई दिवस -

    1 मई 1923 को उस समय के कम्युनिस्ट नेता सिंगार वेलू छत यार ने चेन्नई में मई दिवस मना कर ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ मजदूरों के आंदोलन को खड़ा करने में एक अहम भूमिका निभाई.

    100 से ज्यादा देशों में रहता है अवकाश -

    आज दुनिया के अंदर सबसे ज्यादा देश 1 मई के दिन मजदूर दिवस के रूप में राष्ट्रीय अवकाश रखते हैं. वही हमारे देश की सरकार ने ना तो इसे मजदूर दिवस के रूप में घोषित किया है न, ही राष्ट्रीय अवकाश दिया जाता है.
    वही हमारे देश के 10 राज्यों में राज्य सरकारों ने अपने राज्यों में 1 मई को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया हुआ है.
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