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    लक्ष्य "सहज" है, सम्मान के लिए "सजग" नहीं :

  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi
    • Posted on April 28
    लक्ष्य "सहज" है, सम्मान के लिए "सजग" नहीं :


    लंबित मांगों को पूरा कराने की,
    मांग को लेकर कब तक ;
    चलता रहेगा प्रदर्शन :

    { क्या "सेल" विचार करेगा, एक मई को और प्रदर्शन ना हों }

    भिलाई : एक मई 'मजदूर-श्रमिक' दिवस है, ऐसे में कई सवाल है और कई मुद्दे भी.
    लेकिन, कब तक ?
    स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड "सेल" का लक्ष्य उत्पादन को लेकर जितना 'सहज' है !
    श्रमिक हितों को लेकर 'सजग' क्यों नहीं ?
    इस समय भी एक खबर है, कि "सेल" ने भिलाई इस्पात संयंत्र को एक बड़ा उत्पादन लक्ष्य दिया है, जिसे प्रबंधन ने भी 'सहज' ही लिया है !
    पर, श्रमिक हितों की ओर 'सजग' नहीं ?
    हिंदुस्तान स्टील एंप्लाइज यूनियन ( सीटू ) के सैकड़ों सदस्यों/समर्थकों ने बोरिया गेट पर प्रदर्शन कर "सेल" बोर्ड से यह मांग की थी, कि भिलाई में 26 एवं 27 अप्रैल 2018 होने जा रहे सेल (SAIL)की बोर्ड मीटिंग में अर्जित अवकाश (EL) एवं त्यौहार अवकाश (FL)नकदीकरण का फैसला करें साथ ही वेतन समझौता जल्द शुरू करने एवं सेल पेंशन योजना को मंजूरी दिलाने के लिए सार्थक प्रयास प्रारंभ करें.

    द्विपक्षीय संस्कृति नष्ट ना करें सेल प्रबंधन -

    गुरुवार और शुक्रवार को भिलाई में आयोजित "सेल" बोर्ड बैठक के ठीक 1 दिन पहले सीटू ने बोरिया गेट पर प्रदर्शन करके स्पष्ट संदेश दे दिया था, कि यदि प्रबंधन लगातार एकतरफा स्वेच्छाचारी निर्णय लेता रहा तो कर्मचारी चुप बैठने वाले नहीं हैं.
    प्रदर्शन के द्वारा सीटू ने मांग की कि बोर्ड द्विपक्षीय संस्कृति को नष्ट ना करें क्योंकि द्विपक्षीय संस्कृति "सेल" (SAIL) की बड़ी ताकत है. ज्ञात हो कि "सेल" पहला संगठन है जहाँ उद्योग स्तर पर सबसे पहले द्विपक्षीय समिति का गठन हुआ.

    एनजेसीएस के निर्णय -

    एनजेसीएस में न केवल कर्मचारियों की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए बल्कि, उद्योग को बचाने के लिए भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गए हैं.
    1999 में पुनर्रचना के नाम पर अमेरिकी परामर्शदात्री प्रतिष्ठान ‘मेक केंसी’ (MC Kensey) के संस्तुति (recommendation) पर "सेल" के विघटन की योजना को एनजेसीएस ने ही पूरी ताकत से विरोध करके पलटा था, वरना आज "सेल" के सारे पावर प्लांट ENRON जैसी धोखेबाज निजी कंपनी के हाथों बिक गई होती जो आज दुनिया के नक्शे से गायब है.
    इसी तरह चीन से आने वाले सस्ते आयात पर रोक लगाने के लिए भी एनजेसीएस की यूनियनों ने पहल कर एंटी डंपिंग टैक्स लगवाया, जिससे मौजूदा आर्थिक संकट से जूझ रहे इस्पात उद्योग को कुछ राहत मिला.

    "सेल" पेंशन स्कीम तत्काल शुरू करने, पारित करवाने हेतु हों सामूहिक प्रयास -

    सीटू ने मांग की कि पेंशन स्कीम पर 7 जुलाई 2014 को फैसला हो चुका था, फिर भी कभी बोर्ड तो कभी मंत्रालय तरह-तरह के अड़॔गे लगाकर इसे अब तक लागू नहीं होने दिया है.
    एनजेसीएस में पेंशन स्कीम पर समझौता करने के पश्चात सेल बोर्ड के द्वारा मोहर लगाए जाने के पश्चात अनुमोदन हेतु सेल पेंशन स्कीम को इस्पात मंत्रालय भेजा गया है, किंतु मंत्रालय से अभी तक अनुमोदित होकर फाइल वापस नहीं आई है.
    बताया गया है, कि पिछले दिनों कोलकाता में संपन्न हुए SESBF की बैठक में भी सीटू नेता पीके दास ने इस बात को प्रबंधन के सामने रखा, कि इस्पात मंत्रालय से पेंशन फाइल के संदर्भ में प्रबंधन एवं यूनियन अपने अपने स्तर पर बातचीत कर रही है, किंतु 'सेल पेंशन' योजना को इस्पात मंत्रालय से अनुमोदित करवाने हेतु यूनियन नेता ऑफिसर्स एसोसिएशन के साथी एवं "सेल" के अधिकारी द्वारा संयुक्त रुप से पहल किया जाना चाहिए.

    E L/ F L नगदीकरण अविलंब शुरू हो बढ़ेगा कर्मियों का मनोबल -

    प्रदर्शन के दौरान सीटू नेताओं ने कहा, कि "सेल" बोर्ड की बैठक में यदि नकदीकरण के संदर्भ में सकारात्मक फैसला लेते हुए यदि ई.एल.एफ.एल. नगदीकरण अविलंब शुरू किया जाता है, तो यह संयंत्र एवं कर्मियों दोनों के हक में एक सार्थक पहल होगा.
    क्योंकि 240 दिन ड्यूटी करने के पश्चात अर्जित किए हुए ई.एल. का नगदीकरण ना होने के कारण कर्मचारी ना चाहते हुए भी कई बार अपनी छुट्टियों को समाप्त करने के लिए छुट्टी लेता है, जिससे प्रबंधन छुट्टी के दिन का वेतन तो उस कर्मी को देना ही पड़ता है साथ ही उससे संयंत्र की हित में कोई काम भी नहीं ले पाता.
    यदि "सेल" प्रबंधन ई.एल.एफ.एल. नगदीकरण अविलंब प्रारंभ करता है, तो कर्मचारी जबरदस्ती ई.एल. एवं एफ.एल. लेने की बजाय उसे बेच कर अपनी आवश्यकताओं को पूरा करेगा, साथ ही पूरी ड्यूटी करते हुए संयंत्र के उत्पादन में पूरे लगन के साथ कार्य कर सकेगा, जो कि कर्मचारी एवं संयंत्र दोनों के हित में एक अच्छा कदम होगा.

    सकारात्मक फैसला लेना बोर्ड की जिम्मेदारी -

    सीटू नेताओं ने कहा, कि जब भिलाई इस्पात संयंत्र सहित पूरे "सेल" की वित्तीय स्थिति बेहतर नहीं थी एवं सेल घाटे में जा रहा था तब प्रबंधन द्वारा बंद किए गए सुविधाओं के संदर्भ में कर्मचारियों ने भी परिस्थितियों को समझते हुए उसका समर्थन किया था.
    किंतु आज जब भिलाई इस्पात संयंत्र सहित "सेल" की सभी इकाइयां धीरे-धीरे करके बेहतर स्थिति में आ रहे हैं, ऐसे समय में सेल बोर्ड को यह फैसला लेना चाहिए, कि "सेल" के मुश्किल समय में कर्मचारियों की सुविधाओं में की गई कटौतियों को एक-एक करके बहाल करने की प्रक्रिया प्रारंभ की जानी चाहिए.
    जिससे कि कर्मचारियों के अंदर उत्साह का वातावरण निर्मित हो एवं वे उच्च मनोबल के साथ संयंत्र के उत्पादन में बढ़ चढ़कर अपनी भूमिका को अदा कर सकें.

    वेतन वार्ता शुरू करने हेतु बैठक बुलाई जाए -

    सीटू नेताओं ने कहा, कि वेतन वार्ता 1 जनवरी 2017 से लंबित है एवं प्रबंधन ने अभी तक इस संदर्भ में ना ही, तो कोई पहल प्रारंभ की है, इसीलिए "सेल" प्रबंधन जल्द से जल्द एनजेसीएस की बैठक आयोजित करवायें.
    जिससे कि पिछले वेतन वार्ता के लंबित मांग के साथ साथ 1 जनवरी 2017 से लंबित वेतन समझौता पर सकारात्मक कार्यवाही प्रारंभ हो सके.
    और लोकतान्त्रिक प्रणाली से लबरेज इस देश में एक जगह तो प्रदर्शन होना, बंद हो ही जायेगा.
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