Participating partners:


    चिंता व् चिंतित की राजनीति ---

  • Amit k. Pandey 'Shashwats'
    Amit k. Pandey 'Shashwats'
    • Posted on October 3, 2017
    चिंता व् चिंतित की राजनीति ---
    समाज एवं देश में चिंता व् चिंतित होने की विशेष संस्कृति का प्रादुर्भाव हो चुका है . यह पूरी तरह से राजनीतिक कर्तव्य की इतिश्री अर्थ जैसा ही हुआ दीखता है . बहुधा सामने आता है की आस पास की समस्या से लेके ज्वलंत मुद्दों तक के लिए चिंता का प्रदर्शन कर चिंतित होने की शैली मात्र सामने आकर रह जाती है . अगर मुद्दा पहुंच से ऊपर का है अथवा चिंता में कुछ चिंतन आने की सम्भावना होती है तो अक्सर ऐसे तार्किकता को उपहासित करके अर्थ निकलने की जगह समस्या को भयावहता की ओर जाने का मार्ग ही बनने के लिए किनारे कर दिया जाता है .फिर बात गर आमने सामने की पहुंच वाली हो तो समूचा ही किनारा ले लिया जाता है . अर्थात चिंतन का रुख भी नहीं हो पाता. किसी ने इसके लिए कुछ कहा या करने की चेष्टा मात्र भी की तो उसके विचलन हेतु विभिन्न स्तर से तथा कई प्रकार से अनेक दिग्भ्र्माण के बोझ लिए "लंगड़ी मार तत्व" सक्रीय हो ही जाते हैं . नतीजा चिंतन सीमित रह जाता है . कहने में अतिश्योक्ति नहीं की तथाकथित बड़े बड़े और सफेदपोश तक हास्यास्पद "लंगड़ी ही में लगे अंजुरी भरते" भी रहते हैं ..
    Post Comments Now
    Comments