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    मिज़ाज :

  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi
    • Posted on May 12
    मिज़ाज :

    बदलते मौसम का ?
    एक पुरवाई
    ऐसी चली,
    छींटे बूंद-बूंद
    प्रकृति ने दिये.
    बदलते मौसम की
    दस्तक,
    कैसे हम कहें.
    गर्मी का मौसम,
    और ये बरसात !
    ये वैसे ही
    जब,
    सत्ता की सुख
    दूर कर ही दिये.
    तब,
    खामोशी से कोई
    सिमटे-दुबके बैठे से.
    कहीं,
    खामोशी है
    कि,
    नतीजा का इंतजार.
    कहीं कम नहीं हों,
    ताकत हमारी
    बहाए कितने पशीना.
    बेवजह नहीं,
    ये पशीना
    क्योंकि,
    मौसम गर्मी का जो है.
    पर,
    मौसम ने भी
    बहा दिए पशीना.
    छींटे,
    बूंद-बूंद
    बदले-बदले से मौसम.
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