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    सपने :

  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi
    • Posted on December 7, 2017
    सपने :
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    हम सभी मुंगेरीलाल हैं ,
    ये सपनों का संसार है ।
    हैं बेचते कितने सपने को ,
    सौदागर सपनों के कहलाते ।
    सपने हमारे सच ना हुए ,तो
    सपनों में ही हम बिक जाते ।
    हम सभी मुंगेरीलाल हैं ,
    ये सपनों का संसार है ।
    आ जाए सपनें सोते ही ,
    सोना ही सोना दिख जाये ।
    सोने की जरूरत किसे नहीं ,
    पर सोने वाला खो जाए ।
    जब सोना ही जीवन बन गई,
    तो दिखता सोना-सोना है ।
    ये सपनों का संसार है ,
    हम सभी मुंगेरीलाल हैं ।
    सपने भी कभी तो सच होंगे,
    जब सपने आए नींद नहीं ।
    ना बनें मुंगेरीलाल हम ,
    हो जाए सपने सच भी कहीं ।
    हों यही हकीकत सपनों की ,
    अब नींद नहीं सपने होंगी ।
    जब सपनें पूरे होंगे तो ,
    फिर नींद कहीं तो गुम होगी ।
    अच्छा है सपने देखो ,
    पर नींद नहीं आये कोई ।
    ना बने मुंगेरीलाल कहीं ,
    बस सपनों को सपने रख दो ।।
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