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    पिता की याद में... आज भी ! जो बनी प्रेरणा ::

  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi
    • Posted on November 11, 2017
    पिता की याद में... आज भी ! जो बनी प्रेरणा ::

    बाबूजी कह गये,
    बेटा ;
    चिता को अग्नि देकर
    जब,
    लौटोगे मुझसे अकेला ।
    पर,
    मत रोना ;
    मेरी कही बातों का
    प्रत्येक अर्थ होगा सपना ।।
    आज,
    मैं बोलता हूँ ;
    जीवन का मेरा,
    अनुभव अपना ।
    सुधार कर लो जीवन में,
    जो गलतियाँ हमसे हुई ;
    प्रवृत्ति है इंसान की
    कभी,
    गलतियाँ करना ।।
    गलती हुई तो,
    ना ;
    शर्म करना ।
    क्षमा याचना सच है,
    गलती को सुधारना ।।
    श्रम करना,
    शर्म नहीं ;
    काम हो छोटा
    या,
    हो कोई बड़ा ।
    झुकना ;
    जिंदगी की नेमत है,
    सबसे बड़ा ।।
    झुका हुआ पेड़
    फलों से लदा,
    जैसे ;
    नहीं टूटता ।
    आँधी और सैलाब
    हो,
    कोई वह ;
    सह लेता है अकेला ।।
    बस ;
    याद रखना
    मेरी यह सीख ।
    जिंदगी है सपना
    स्वप्न टूटा ;
    कोई नहीं होता अपना ।।
    रह जाती है जमीन,
    घर-बार धन, घमंड ।
    याद रहता है
    प्रतिफल,
    अच्छे कर्मों का उमंग ।।
    बाबूजी कह गये,
    बेटा ;
    चिता को छोड़
    चिंता मत कर ।
    मैं नहीं गया,
    रहूँगा ;
    इसी रूप में हमेशा ।।

    ********************
    - घनश्याम जी. बैरागी
    08827676333
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