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    जमीर को सलामत रखो :

  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi
    • Posted on November 14, 2017
    जमीर को सलामत रखो :
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    जमीन तो बना ली
    क्या जमीर सलामत है,
    बगैर जमीर के
    क्या काम जमीन की ।
    सलामत है जमीर
    तो जमीन बन जायेंगी,
    देर ही सहीं
    खुशियाँ रह पायेंगी ।।
    इन खुशियों की
    बस छोटी सी जगह है,
    जमीन हों कितनी
    जमीर ही वजह है ।
    खुशियों की चाबी
    खो कर बना दी जमीन,
    अब खुशियों की चाबी
    कहां से लाओगे जमीर ।।
    इसे ही समझना है
    कि जमीर में है खुशियाँ,
    सलामत रहे जमीर
    तो खुशियाँ ही खुशियाँ है ।
    जमीन गया
    दर्द मिट जायेगा,
    जमीर है सलामत
    जमीन मिल जायेगा ।।
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    - घनश्याम जी.बैरागी
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