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    चमचे कैसे - कैसे :

  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi
    • Posted on November 28, 2017
    चमचे कैसे - कैसे :


    चम्मच पात्र का एक ऐसा वस्तु है, जो जितनी सरलता से पात्र में रखे हुए खाने की सामग्री को मुंह तक पहुंचाएगा, उतना ही ज्यादा स्वाद और एहसास दिलाएगा । चम्मच में ज्यादा सामग्री भर दें, तो वह सामग्री नीचे गिरने लगता है । फिर चम्मच को पुन: पात्र में डालना पड़ता है, थोड़ा सा चम्मच को हिला लें, तो संतुलित सामग्री चम्मच में समाहित हो जाती है ।
    यह तो हुई एक धातु वस्तु, जो चम्मच है । लेकिन, आम बोलचाल की भाषा में चम्मच का अर्थ सिर्फ कल्पनाओं में ही समझा जा सकता है । यहाँ पर पात्र और चम्मच व्यक्तियों के रूप में बदलते देखा जा सकता है । क्योंकि, पिछले पैराग्राफ में चम्मच और पात्र दिखाने वाली धातु की वस्तुएँ होती है । लेकिन यहाँ नहीं !
    मनुष्य जीवन में एक रिश्ता, जैसे कोई किसी का भाई या भतीजा है ; जो आने वाले कई वर्षों और पीढ़ियों तक उन्हे उसी रिश्ते में याद किया जाता है । लेकिन चम्मच शब्द का पात्र समय के साथ-साथ बदल जाता है । यह, आम बोलचाल की भाषा का चम्मच किसी विशिष्ट व्यक्ति के इर्द-गिर्द देखा जा सकता है ।
    जब किसी अन्य व्यक्ति को इस विशिष्ट व्यक्ति के करीब पहुंचने में किसी अन्य सहयोगी व्यक्ति की वजह से परेशानी हो, तो यहाँ शब्द उभरता है "चम्मच" ! अरे वो चम्मच है ना, जो किसी को भी वहाँ फटकने नहीं देता ! या, कई बार तो यह भी कहा जाता है कि, देख लेना, ये चम्मच उसे ले डूबेगा ! और उस विशिष्ट व्यक्ति की कोई गलती भले ही ना रहे, इनकी नजर में उनका भविष्य तय हो जाता है ।
    कभी-कभी इस तरह के व्यक्ति, जिसे चम्मच माना जाता है, उसी तरह से कुछ ज्यादा कर देता है, जैसे पात्र मेंं रखे हुए चम्मच मेंं सामग्री ज्यादा होने से सामग्री गिरने लगता है । वहाँ तो उस चम्मच से सामग्री को संतुलित कर लेते हैं, लेकिन यदि, यहाँ इस कल्पनीय चम्मच के उफान को संतुलित नहीं किया गया या नहीं रोका गया, तो फिर उस विशिष्ट व्यक्ति, जिसका वह खास बना हुआ है, फिर दूसरे व्यक्ति की भविष्यवाणी "ले डूबने वाली" पूर्ण होते दिखती है ।
    कभी धातु के चम्मच से सामग्री लें जो गर्म हो, जिससे मुंह जलने का भय हो, उसे थोड़ा हिलाया जाता है , चम्मच मेंं रखे सामग्री को हल्का-सा फूंक लगाया जाता है, ताकि सामग्री ठंडा हो जाये । यहाँ भी ऐसा ही कुछ किया जाता है ! जब उस विशिष्ट व्यक्ति की ओर से इस खास व्यक्ति को कोई काम या जवाबदारी दिया जाता है । और यदि नहीं किया, तो उस दूसरे व्यक्ति के कहे अनुसार उस विशिष्ट व्यक्ति का वही हाल होता है ! फिर ; कहा था ना, देख लेना ये चम्मच उसे एक दिन ले डूबेगा । सच दिखने लगता है !
    धातु का चम्मच सदियों से सामग्री को संतुलित करने या भोजन लेने उपयोग किया जाता रहा है । इनके रूप अलग-अलग भले ही होते हैं, लेकिन काम एक जैसा ही है । आज इस चम्मच की उपयोगिता बढ़ गई है ! पहले लोग भोजन करने हाथ के सभी उंगलीयों का इस्तेमाल करते थे, लेकिन आज ज्यादातर तीन उंगलीयों का ही उपयोग करते देखे जा सकते है , जिससे चम्मच पकड़ें, ताकि हाथ गंदे ना हों ।
    ठीक इसी तरह इस कल्पनीय पात्र को किसी खास कार्य के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें बड़ा जोखिम हो । तब वही दृष्टिकोण होता है, जैसे, भोजन पकाते समय गरम कड़ाई में चम्मच को डाला जाता है ताकि हमें तकलीफ ना हों । बस इसी तरह यदि काम सफल रहा तो वह पात्र बदल जाता है, और वह "खास " हो जाता है । पर इस सब में बेचारा "चम्मच" बदनाम हो जाता है !
    कल्पनीय चाहे जो भी हो, लेकिन यह धातु का चम्मच और पात्र हमेशा ही साथ रहे हैं । और आगे भी साथ-साथ रहने वाले हैं । यहाँ इनके नाम भी नहीं बदलने वाले हैं ।
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    - घनश्याम जी. बैरागी
    08827676333
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