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    ₹. बाजार ही दुनिया है :

  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi
    • Posted on February 10
    ₹. बाजार ही दुनिया है :

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    बाजार ही दुनिया है,
    खरीददार हैं कितने ।
    बेचने वाले ही कम हैंं ।।
    बेचने की जुगत भी,
    दिखती है कमी में ।
    खरीददार हों कितने ।।
    खरीदी की भाव भी,
    दिखती है उतनी ।
    खरीददार हों जितने ।।
    जमाखोरी ही कहीं,
    बढ़ाती है भाव को ।
    खरीददार हों कम भी ।।
    खरीदने की क्षमता,
    हों यदि भी तुम में ।
    खरीददार हों कितने ।।
    भाव हों जितने भी,
    खरीदने भी आयें हैं ।
    खरीददार हों जितने ।।
    खरीदी कर जायेंगे,
    दुनिया में यदि आयें है ।
    खरीददार हों कितने ।।
    खरीदी और बेचने की,
    रीति भी है बाजार में ।
    बाजार ही दुनिया है ।।

    - घनश्याम जी. वैष्णव बैरागी .
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