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    हाल-ए-दिल

  • samar bhaskar
    samar bhaskar
    • Posted on May 21
    हाल-ए-दिल



    हमें गुरूर नहीं है ग़ालिब! तुम जैसे लब्ज बोलकर
    ये तो हाल-ए-दिल है
    जिसे बेशक रख देते हैं हम सबके सामने खोलकर
    हर दिल की सदा एक नहीं
    तौहीन न करो इस सदा की हर दिल से तोलकर
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