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    हार...

  • Ashutosh
    Ashutosh
    • Posted on June 25
    हार...
    हार...
    चला था घर से
    एक उम्मीद लेकर
    सपनो की पूरी
    एक रसीद लेकर
    सपने बङे थे
    हौंसला बुलंद था
    दुनियां जितने का
    इरादो मे दम था
    जोश था जूनून था
    हर तरफ शुकून था
    रिश्ते बने यार बने
    कुछ अच्छे कुछ बेकार बने
    संग खाते संग पीते थे
    एक दूजे मे जीते थे
    हुई पढाई खत्म
    तो हुआ सितम
    बिछङ गये य़ार
    दे गये गम
    आगे कदम बढाना था
    करके कुछ दिखाना था
    सपने पूरे करने थे
    ना घर लौट के जाना था
    दौलत कमाई
    शौहरत कमाई
    पर खुश था जहाँ
    वो दुनियाँ गवाई
    दोस्त गये
    परिवार गया
    सब पा कर भी
    हार गया ।।
    आशुतोष सैनी
    09528055693
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