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    हद-ए-मोहब्बत

  • Ashutosh
    Ashutosh
    • Posted on May 2
    हद-ए-मोहब्बत
    हद-ए-मोहब्बत
    सोचता हूँ, उसकी मोहब्बत मे
    चन्द शब्द लिख ङालू
    दिल मे दबे जज्बातो को
    कलम की स्याही से,
    कागज पर निकालू
    उलझा हूँ मै,
    उसके घने काले बालो से
    पीता हूँ मै,
    उसके चमकते रसीले गालो से
    ङूबा हूँ मै,
    उसकी आँखो की गहराई मे
    कई जन्मो से,
    या हजारो सालो से
    होंठ तो उसके, जैसे
    गुलाबो के जाम है
    जिनसे झलकते हमेशा
    प्यार के पैगाम है
    उसके हसीन चेहरे पर
    मासूमियत का नूर है
    इस कदर सर पे चढा
    उसके इश्क का फितूर है
    कि उसके हुसन-ए-तारीफ मे
    अपनी कलम तोङ दूँ
    इतने लिखूँ तारीफ-ए-शब्द
    कि स्याही की हर एक बूँद निचोङ दूँ.।।

    BY ASHUTOSH SAINI
    09528055693

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    Comments (1)
    • Ashutosh
      Pratima Pandey पर कम्बख्त कॉलोनी में दूसरी आ गयी