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    सुकूं-ए-इश्क

  • samar bhaskar
    samar bhaskar
    • Posted on March 17
    सुकूं-ए-इश्क
    तू नहीं है मगर कानो से तेरी आहट नहीं हटती |
    दिल मिट गया मगर दिल से तेरी चाहत नहीं मिटती|
    जो सुकूं मिलता है तेरे इश्क-ए-इबादतखाने में,,,,
    दुनिया के मैखाने में वो रहत नहीं मिलती ||||
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