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    समां-ए-जिंदगी

  • samar bhaskar
    samar bhaskar
    • Posted on September 10
    समां-ए-जिंदगी
    ये रातें बड़ी रंगीन और काली है,
    जो कटती हैं कभी सो के तो कभी जागकर।
    ये जिंदगी की लकीर बड़ी निराली है,
    जो मिटती है कभी थम के तो कभी भागकर।
    ये जिंदगी की आयतें बड़ी आली है,
    जो लिखती है कभी भूल के तो कभी यादकर।
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