Participating partners:


    समां-ए-जिंदगी

  • samar bhaskar
    samar bhaskar
    • Posted on September 10, 2017
    समां-ए-जिंदगी
    ये रातें बड़ी रंगीन और काली है,
    जो कटती हैं कभी सो के तो कभी जागकर।
    ये जिंदगी की लकीर बड़ी निराली है,
    जो मिटती है कभी थम के तो कभी भागकर।
    ये जिंदगी की आयतें बड़ी आली है,
    जो लिखती है कभी भूल के तो कभी यादकर।
    2 People like this
    samar bhaskar1 Guest Likes
    Post Comments Now
    Comments (1)