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    शायरी सावन की

  • samar bhaskar
    samar bhaskar
    • Posted on July 10
    शायरी सावन की
    न कुरेद ऐ सावन! उन लम्हो को,,,
    अपनी धार से सोले बरसाकर ।
    हम तो बैठ गए हैं यद् की आग को,
    इन सूखे अश्कों से बुझाकर।।।
    तू हर पल याद दिलाता है उसको,,
    जो चला गया मुझे भुलाकर।।
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