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    शक-ए-मौहब्बत....

  • Ashutosh
    Ashutosh
    • Posted on October 1, 2017
    शक-ए-मौहब्बत....
    शक-ए-मौहब्बत....
    जब वो दूर जाने लगे
    अपना दामन छुडाने लगे
    गैरो के नाम की मेहंदी
    अपने हाथो पे रचाने लगे
    तो चीर के दिल हम
    उसका नाम मिटाने लगे
    नाम तो मिटा नही
    पर धडकने रूक गयी
    और मेरी मौहब्बत यारो
    उसकी बेवफाई के आगे झुक गयी
    पर मेरे जाने के बाद
    वक्त ने ऐसा मुँह फेरा
    मेहंदी लगे उन हाथो के पिछे
    था मजबूरी का राज गहरा
    वो जी तो रही थी मेरे बिन
    पर उसका हर एक लम्हा
    था मुझ पर ही ठहरा
    उसके प्यार के आगे
    मेरी मौत बेकार हो गयी
    शक के चलते आज मौहब्बत
    मौहब्बत ही से शर्मशार हो गयी ।।
    आशुतोष सैनी 09528055693
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