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    ये एहसान तुम्हारा है

  • अब्बू जाट
    अब्बू जाट
    • Posted on January 8
    ये एहसान तुम्हारा है
    झूम रही है सारी दुनिया जब कि हमारे गीतों पर, 
    तब कहती हो प्यार हुआ है ,  क्या एहसान तुम्हारा है !

    बीच भंवर में छोड़ दिया था मेरी नाजुक किश्ती को,
    आज बना साहिल मैं खुद का अब तुमने दिया सहारा है !

    दुःख का दरिया उमड़ रहा था भंवर पड़ा था जब उसमें,
    तूफानों मैं उलझ गया था पर अब मिल गया किनारा है !

    तुम चले गए अपनी दुनिया में मैं भी तुमको भूल रहा,
    आज मगर क्यों ख्वाब में आकर तुमने मुझे पुकारा है !

    तुम कहते थे मैं पागल हूँ वो भी मैंने स्वीकार किया,
    चाहत ने पागल बना दिया इसमें क्या दोष तुम्हारा है !

    तुम मिल जाओ ये माँगा बस तुम न मिले कोई बात नहीं,
    याद तुम्हारी हैं काफी उनके के संग जीना यूं ही गवारा है !

    तुम आये तो लिखना सीखा तुम चले गए मैं नहीं रुका,
    पर तुमने मुझको कवि बनाया  ये एहसान तुम्हारा है !

    नहीं मिले तुम नहीं मिलोगे इसका कोई दर्द नहीं,
    पर सौ बातों की एक बात यही है के अब्बू जाट तुम्हारा है !

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