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    यादे बचपन की...

  • Ashutosh
    Ashutosh
    • Posted on July 1
    यादे बचपन की...
    यादे बचपन की...
    कहाँ गयी वो गलियाँ
    कहाँ गये वो चौबारे
    जहाँ मिलकर खेलते थे
    हम बच्चे सारे
    कहाँ गये वो बाग
    कहाँ गयी वो बहारे
    जहाँ बैठकर बनते थे
    सभी प्लान हमारे
    कहाँ गया वो चन्दा
    कहाँ गये वो तारे
    जिनकी छाँव निचे
    हमने दिन गुजारे
    कहाँ गये वो दिन
    कहाँ गयी वो राते
    पहले गलती करना
    फिर माफी की बाते
    कहाँ गयी वो धरती
    कहाँ गया वो गगन
    जहाँ पर था शुकून
    जिसके निचे था अमन
    कहाँ गयी वो बारिश
    कहाँ गया वो मौसम
    ना कपडो की चिन्ता
    ना बिमार होने का गम
    कहाँ गया वो घर
    कहाँ गया वो आगँन
    जहाँ रहते थे हम
    जिसमे लगता था मन
    कहाँ गयी वो खुशियाँ
    कहाँ गये वो सपने
    उजड गयी ये दुनियाँ
    जब बिछड गये अपने ।। आशुतोष सैनी
    09528055693
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    Comments (1)
    • Ashutosh
      Vinod Kumar Singh यादें बचपन की, वो हसरतें रह गई , वो बचपन गुमनाम हो गई, काश जमाना वही रहा होता, निश्चिंंत रहती अपनी दुनिया, न रहा होता गम, वो अब सपना रह गया, लेकिन अब वो आबो हवा नहीं, जो अपना बचपन था,वो सुकून भरी बचपन नहीं रह गई, अब जमाना ही पलट गया, वो अब बचपन का लड़कपन ...  Read more