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    मेरे मन की मैंने कहि,तेरे की तू जान

  • Manoj kumar gupta
    Manoj kumar gupta
    • Posted on November 12
    मेरे मन की मैंने कहि,तेरे की तू जान
    सुधार-सुधार सभी कहें,खुद का सुधार करे न कोई,
    जो आप ही सुधर जावे,तो जग में उलझन न होय कोई।
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