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    मेरी सोच

  • gulmohammad
    gulmohammad
    • Posted on January 25
    मेरी सोच
    शिकायते तो बहुत है तुझसे ऐ जिन्दगी,
    पर चुप इसलिये हु कि, जो दिया तूने,
    वो भी बहुतो को नसीब नहीं होता
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