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    मेरा ज़िन्दगी जीने का तरीका.

  • Abhay Tripathi
    Abhay Tripathi
    • Posted on March 17
    मेरा ज़िन्दगी जीने का तरीका.
    मेहनत से उठा हूँ , मेहनत के दर्द जनता हूँ.
    आसमा से ज्यादा जमी की क़द्र जनता हूँ.

    लचीला पेड़ था जो झेल गया आंधिया
    मैं मगरूर दरख्तों का हश्र जानता हूँ.

    छोटे से बड़ा बनना आसाँ नहीं होता,
    ज़िन्दगी में कितना जरुरी है सब्र जानता हूँ.

    मेहनत बढ़ी तो किस्मत भी बढ़ चली,
    छालो में छिपी लकीरो का असर जानता हूँ.

    कुछ पाया पर अपना कुछ नहीं माना,
    क्योंकि आखिरी ठिकाना मेरा मिटटी का घर जानता हूँ.

    बेवक्त, बेवजह, बेहिसाब मुस्करा देता हूँ,
    आधे दुश्मनो को तो यूँ ही हरा देता हूँ............
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