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    मजहब

  • Shubhendra Tripathi
    Shubhendra Tripathi
    • Posted on June 17, 2017
    मजहब
    मजहब ,मजहब करते हो तुम ,
    क्या मैं तुमको बतलाऊ ,
    मजहब की अच्छी बातों का क्या है मतलब तुमको समझाऊ ,
    तुमने तो सीखा है केवल मासूमो का खून बहाना ,
    मजहब के नाम पर लोगो को लोगो से लड़वाना ..
    नफरत की आंधी मे भूल जाते हो हर एक बात ,
    तुम्हें क्या पता कैसा होता है एक परिवार ,
    तुमने कई गोदें सुनी की होंगी ,
    पर ये क्यूँ भूल जाते हो, तुमने भी माँ की उंगली पकड़ी होगी
    जिन बच्चों की मुसकानों पे तुमने विराम लगाया, और उन बूढ़े बापों से उनका आसरा छिनवाया
    सोचों ...सोचों.. उस जगह तुम्हारे माँ बाप होते तो क्या करते ?
    वो मजहब को कोसते या मरते....
    ये सब बातें तुमको कैसे मैं समझाऊँ , हूरें नहीं पापकर्म मिलेंगे ये कैसे बतलाऊँ
    आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता , इसे स्वीकार करो ,
    नफरत छोड़ो और इस दुनिया से प्यार करो ॥
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