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    बिना शायरी की जिन्दगी

  • Vinod Kumar Singh
    Vinod Kumar Singh
    • Posted on August 10
    बिना शायरी की जिन्दगी
    बिना शायरी की जिन्दगी कैसी, वो गम भी कैसा वो जिसमें गम का शायराना न हो , वो अन्दाज भी कैसा जिसमें शायराना का नजराना न हो, खुदा भी करे खुशनशीबों का अन्दाज भी निराला हो , गम भी हो कम भी हो, खुशी का नजराना लिए अन्दाजे मिसाल हो !
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