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    बरकते-इश्क

  • samar bhaskar
    samar bhaskar
    • Posted on May 25
    बरकते-इश्क
    उमड़ती नदी को देखकर
    समंदर भी आता है उफान पर।।
    कोई चट्टान कब्ज़ा कर न सकी
    इस तेज इश्क के तूफ़ान पर।।।
    इश्क में कोई कुछ पाता नहीं
    पाता है चंद लम्हो की मौज
    वो भी खेल के अपनी जान पर।
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