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    नई शुबह का अट्ठहास

  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi
    • Posted on January 1
    नई शुबह का अट्ठहास

    सर्द रात्रि
    घनघोर कोहरे में
    लिपटा प्रकृति....
    शुबह-सवेरे
    गयी बदली,
    आया कोहरा
    रुनझुन गरमी,
    सबको भाया....
    झील के उपर
    धुँआ-धुँआ
    जैसे,
    प्रकृति ने
    चादर बिछा दिया।
    नये वर्ष की
    आप सभी को,
    शुभकामनायें ।।
    श्रृंगारित सत्रह ।
    अट्टहास करता
    आया अठारह ।।
    सुंदर चांदनी
    धुंआ- धुंआ
    प्रकृति ओस में
    ड़ुबा-हुआ....
    गया सत्रह
    आई.....
    सुबह की
    श्रृंगारित, अठारह ।।

    - घनश्याम जी.बैरागी
    08827676333
    gbairagi.enews@gmail.com
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