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    दर्दे-ए-मौत...

  • Ashutosh
    Ashutosh
    • Posted on September 30
    दर्दे-ए-मौत...
    दर्दे-ए-मौत...
    वो गैरो की बाँहो मे
    खुशी-खुशी जब सिमट गये
    हम पर तो मानो जैसे
    गम के बादल फट गये
    आँखे फटकर
    दरियां बहने लगा
    दिल तडपकर
    ये कहने लगा
    कि आशुतोष,
    दुनियाँ भर के गम
    तेरे दामन से लिपट गये
    हम पर तो मानो जैसे
    गम के बादल फट गये
    दुखी मन लेकर
    वापस घर जा रहे थे
    तडपते इस दिल को
    रो रो कर समझा रहे थे
    कि हुआ ऐसा हादसा
    बस वहीं निपट गये
    हम पर तो मानो जैसे
    गम के बादल फट गये।।
    आशुतोष सैनी 09528055693
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