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    जुनूने-जवानी

  • samar bhaskar
    samar bhaskar
    • Posted on January 2
    जुनूने-जवानी
    जुनूने-जवानी.......
    जल मरते है परवाने सम्मा में,
    अपनी आदत से मजबूर होकर।
    दीवानगीमें छोड़ देतें है मंजिल असल की,
    आखिर तड़पते हैं उसी को उससे दूर होकर।
    जुनूने-जवानी में अंधेरा ही नूर लगता है
    आखिर रोते हम जीवन का नूर खोकर।।।
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