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    छेड़ दो :

  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi
    • Posted on December 29, 2017
    छेड़ दो :

    लहरें खामोश होतीं हैं,
    अपनी गति में ही सोती हैं ।
    मत छेड़ इन लहरों को,
    ये ;
    अजनबियों को लील देती है ।।
    लहरों से सीखने है,
    तो खामोशी तोड़ने होंगे ।
    छेड़ दो तराने,
    इन लहरों की तरह ;
    खामोशी से
    जो चल रहें हैं सदियों पुराने ।।
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