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    चाहत...

  • Ashutosh
    Ashutosh
    • Posted on June 28
    चाहत...
    चाहत...
    इन आँखो के महकाने मे
    इन होंठो के पैमाने मे
    इक जाम मुझे भी पीने दे
    क्या ङर है तुझे पिलाने मे
    इन आँखो मे जो नशा है
    इन होंठो मे जो मजा है
    इक पल मुझे भी लूटने दे
    क्या हर्ज है तूझे लूटाने मे
    इन आँखो मे जो शोले है
    इन होंठो मे जो आग है
    इक बार मुझे भी मौका दे
    खुद जल जाँऊ इसे बुझाने मे
    इन आँखो मे जो शरारत है
    इन होंठो मे जो मस्ती है
    इक उमर गुजार दी हमने
    पर कहीं नही जमाने मे ।।
    आशुतोष सैनी
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