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    चाहत में चैन कहाँ

  • samar bhaskar
    samar bhaskar
    • Posted on October 2
    चाहत में चैन कहाँ
    इश्के-समंदर में डूबकर भी,
    दिल की प्यास नहीं मिटती।
    जो चली है आँधी बेचैनी की वो,
    अमन की दीवार से भी नहीं रुकती।
    ऐसी आग लगी है चाहत की,
    जो प्यार की बारिश में भी नहीं बुझती।
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