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    चांदनी चार दिन की.....

  • samar bhaskar
    samar bhaskar
    • Posted on February 9
    चांदनी चार दिन की.....
    चांदनी चार दिन की...........
    बुझ जाती है हर चिंगारी कुछ देर सुलगकर,
    सो जाती हैं सिसकियाँ बस कुछ देर जग कर।
    बस कुछ ही दिन करते हैं शेरो- शायरी, इश्क
    और टूटे दिल वाले, और फिर
    चुप हो जाते है सभी किसी और चीज से चिपककर।
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