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    कुसूर दिल का

  • samar bhaskar
    samar bhaskar
    • Posted on May 16
    कुसूर दिल का
    क्यों कुसूर दू कातिल नजरों का तेरी
    मेरी बेचैनी कम्बख्त दिल की गुस्ताखी है
    हर हद पार कर चुका है तेरी चाहत में
    फिर भी अभी तेरा मुकम्मल होना बाकी है
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