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    ऐतबार-ए-इश्क

  • samar bhaskar
    samar bhaskar
    • Posted on March 19
    ऐतबार-ए-इश्क
    दिल-ए-रेगिस्ता में तू बहा जरा आब अपने प्यार का|||
    अब तो सहा नहीं जाता ये रेतीला तूफां इंतजार का||
    अबके आजा ऐ जालिम जरा तरस खा के,,
    कहीं टूट न जाये पुलिंदा मेरे इस ऐतबार का||||||
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