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    उदासी...

  • Ashutosh
    Ashutosh
    • Posted on July 5, 2017
    उदासी...
    उदासी...
    होता आज बुलन्दी पर
    गर थोङी चालाकी आती
    रौब जमाता आज सभी पर
    गर थोङी बदमाशी आती
    मेहनत करके भी,
    सर ना झुकाता
    ना अपनी नजरो मे,
    यूँ गिर जाता
    ना सुनता चुपचाप सभी की
    गर थोङी होशियारी आती
    रौब जमाता आज सभी पर
    गर थोङी बदमाशी आती
    आगे निकल गये ऐसे ऐसे
    औकात थी जिनकी तिनके जैसे
    आज यूँ ना वो आँख दिखाते
    गर थोङी गददारी आती
    ना सुनता चुपचाप सभी की
    गर थोङी होशियारी आती
    ना अपने हमको यूँ रूलाते
    ना दिल पर ऐसी चोट खाते
    होते हम भी सबके प्यारे
    गर ना हमको वफादारी आती
    ना सुनता चुपचाप सभी की
    गर थोङी होशियारी आती ।।
    आशुतोष सैनी 09528055693
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