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    इश्क-इलाही

  • samar bhaskar
    samar bhaskar
    • Posted on October 2
    इश्क-इलाही
    कौन कहता है कि सिर्फ बारिश बादल भरे गगन से होती है,पर
    बूंदे तो तारे भरे गगन से भी गिरा करतीं है।
    मोहबत्त का असली मजा तो दो दलों को ही मिलता है,पर
    अकेले दिल को ही रूहानी मोहब्बत मिला करती हैं।
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