Participating partners:


    इल्म इश्क का

  • samar bhaskar
    samar bhaskar
    • Posted on June 11
    इल्म इश्क का
    तुझे इश्क का जरा भी इल्म नहीं ,
    तभी तो तू खुद पर ऐसे इतराती है।
    इश्क की तड़पन में एक सम्मा,
    परवाने के लिए खुद जल जाती है।
    लहराता है समंदर मौज-ए आब से,
    फिर भी दरिया उसकी प्यास बुझती है।
    Guest likes 8
    Post Comments Now
    Comments