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    आहुति :

  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi
    • Posted on December 30, 2017
    आहुति :

    आहुति शब्दों की
    आहुति वादों की
    आहुति कला है
    गम को भुला देने की ।
    आहुति दोस्ती की
    दुश्मनी मिटाने की
    आहुति कला है
    खुद को जगाने की ।
    आहुति आग में
    द्रव्यों की श्रृंखला है
    कहीं घी कहीं अक्षत
    कहीं पानी
    कहीं पाना है ।
    आहुति जवानों की
    जाया मत होने दें
    हे देश
    अब तू जाग जा
    नहीं खोने की कस्में खा ।
    दे आहुति ;
    सब कुछ पाने की ।।
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