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    आखिरी ख्वाइश...

  • Ashutosh
    Ashutosh
    • Posted on October 8
    आखिरी ख्वाइश...
    आखिरी ख्वाइश...
    जिन्दगी को मेरी अब
    तू मुक्कमल कर दे, मेरे खुदा
    करके बेजान जिस्म को
    तू कंधो पे धर दे, मेरे खुदा ।

    खुद से हारे इन्सान की
    जीतने की उम्मीद कम है
    इस हसँते चेहरे के पिछे
    तू ही जानता है कितना गम है
    मुझे राहे शमशान का
    तू अब सफर दे, मेरे खुदा
    जिन्दगी को मेरी अब
    तू मुक्कमल कर दे, मेरे खुदा ।

    हर दिन एक इन्तजार है
    हर रात एक मौत है
    जीवन के इतने पल
    बस मेरे लिए बहुत है
    जिस्म ए इस बेजान को
    तू कफन से ढक दे, मेरे खुदा
    जिन्दगी को मेरी अब
    तू मुक्कमल कर दे, मेरे खुदा ।

    सिवाय़ मेरी मौत के
    ना कोई दूजा हल है
    बिना उसके यारो
    ना मेरा कोई कल है
    मातम ए मेरी मौत पे
    तू सबकी आँखे भर दे, मेरे खुदा
    जिन्दगी को मेरी अब
    तू मुक्कमल कर दे, मेरे खुदा ।।
    आशुतोष सैनी 09528055693
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