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    आइना-ए-इश्क

  • samar bhaskar
    samar bhaskar
    • Posted on May 17
    आइना-ए-इश्क

    सुन ले ऐ इश्क में इतराने वाले मासूक
    कभी इसके में एहसान जताया नहीं करते
    क्यों तू अक्सर झांकती है मेरे आईना-ए-दिल में
    कुछ राज को आईने भी दिखाया नहीं करते
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