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    अटूट रिश्ता...

  • Ashutosh
    Ashutosh
    • Posted on April 8
    अटूट रिश्ता...
    अटूट रिश्ता...
    माँ...
    घर अपना छोङकर,
    जब मै चलने लगा
    मोम सा दिल मेरी माँ का,
    पिघंलने लगा
    आसूँ उसकी आँखो से,
    बह रहे थे लगातार
    रोते-रोते बोली,
    मेरे सीने से लग जा एकबार
    माथे को मेरे चूमकर,
    सर पे रखकर अपना हाथ
    बोली, सूना हो जाता है ये घर,
    तेरे जाने के बाद
    फिर रोती हूँ दिनभर,
    बस तूझे याद करके
    अब कैसे देखूँगी,
    अपने बच्चे को जी भरके
    दिल पे पत्थर रखकर,
    तूझे खुद से दूर करती हूँ
    तुझ से अलग होकर,
    मै तो हर रोज मरती हूँ
    जब तू छोटा था,
    मै हर पल तेरे साथ रही
    अब ङरती हूँ इस भीङ मे,
    तू खो ना जाए कहीं
    खुदा के आगे जाकर,
    बयां करती हूँ अपना हाल
    दुनियां की हर मुसीबत से,
    बचा रहे मेरा लाल
    मेरी बूढी आँखो का,
    तू ही एक तारा है
    ओ मेरे लल्ला,
    तू मुझे सारी दुनियां से प्यारा है ।।
    बेटा...
    तुझ से दूर होने के बाद,
    एक गम मै भी उठाता हूँ
    बिन तेरे ओ माँ,
    मै भी नही रह पाता हूँ
    माँ तुझसे दूर होना,
    मेरी मजबूरी है
    तेरा नाम रोशन हो,
    घर छोडना भी जरूरी है ।
    लगती है मेरी जिन्दगी,
    मुझे नरक से भी बुरी
    जब चलती है मुझ पर,
    तेरी यादो की छूरी
    याद आता है हर वो पल,
    जो बीता तेरी ममता की छाँव मे
    दिखती है मुझे तो जन्नत,
    माँ तेरे ही पाँव मे
    दिनभर काम कर,
    जब थक्कर रात मे सोता हूँ
    तेरी गोद को याद कर,
    माँ मै खूब रोता हूँ
    दूर रहती है हर मुसीबत,
    तेरी दुआ मे इतना दम है
    माँ अगर तू है तो,
    वजूद मे हम है
    सात जन्म लेकर भी,
    तेरा कर्ज नही चुका पाऊँगा
    सच कहूँ बिन तेरे माँ,
    मै टूटकर बिखर जाऊँगा
    एक मतलब सा दिखता है,
    हर किसी के प्यार मे
    माँ तुझ सा कोई नही है,
    इस सारे संसार मे ।।
    BY ASHUTOSH SAINI
    09528055693
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