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    सरकारी अकादमियों की दुर्गति- शंकर शरण नियति और नियुक्ति

  • Dr Rachana Mishra
    Dr Rachana Mishra
    • Posted on June 29
    सरकारी अकादमियों की दुर्गति- शंकर शरण नियति और नियुक्ति
    सरकारी अकादमियों की दुर्गति- शंकर शरण
    नियति और नियुक्ति
    कार्यपालिका और न्यायपालिका दोनों समाज के महत्वपूर्ण अंग हैं तथा दोनों समाज को सुदृढ़ बनाने में महत्पूर्ण भूमिका निभाते हैं | कार्यपालिका के योगदान से अकादमियों का गठन होता है और पद्लोलुपिता की वजह से सरकारी अकादमियों की हालत खराब हो रही है | यह बात जग जाहिर है कि इन अकादमियों में महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति के लिए उत्कृष्ट अभ्यर्थी के चयन के बजाय अयोग्य और जुगाडी को चुना जाना आम बात हो गयी है | लेखक ने अरबों रूपये व्यय करने वाले अकादमियों के बारें में नाटक करने वाली सटीक बात बतायी है, जो आम घटना अकादमिक संस्थानों के मूल्यांकन में खूब दिखता है | सरकारी अकादमियों में सुधार तब तक मुमकिन नहीं जब तक कि प्रारंभिक, माध्यमिक के साथ उच्च शिक्षण निकाय में नियुक्तिओं को केवल एक अकादमी के माध्यम से आवश्यकता अनुसार राज्य अथवा देश स्तर पर निष्पक्ष और पारदर्शी न बनाया जा सके | साथ ही उच्च पदों पर नियुक्तियों को देश स्तर के केवल एक अकादमी के माध्यम से किया जाय | अधिवर्षिता आयु को साठ साल अनिवार्य रूप से किया जाय तथा विश्वविद्यालयों में साठ साल से ज्यादा आयु के शारीरिक व मानसिक रूप से सक्षम शिक्षकों को केवल और केवल शिक्षण और शोध कार्य हेतु ही चुना जाय |
    रचना, सूखाताल, नैनीताल
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