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    प्रद्युम्न मुखर्जी का भिलाई प्रवास,

  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi
    • Posted on March 12
    प्रद्युम्न मुखर्जी का भिलाई प्रवास,


    सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली में सुधार की आवश्यकता :

    भिलाई : जेसीएसएसआई ( ज्वॉइन कमेटी ऑफ सेफ्टी इस स्टील इन्डस्ट्री ) के सदस्य और इस्पात उद्योग में सीटू की फेडरेशन - स्टील वर्कर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के सचिव प्रद्युत मुखर्जी ने भिलाई प्रवास के दौरान भिलाई इस्पात संयंत्र के महाप्रबंधक (सुरक्षा) पंड्या राज से भेंट की और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर बातचीत की ।
    उन्होंने भिलाई इस्पात संयत्र में लगातार बढ़ रही दुर्घटनाएं विशेषकर प्राण घातक दुर्घटनाओं पर चिंता व्यक्त की । इस दौरान उनके साथ हिन्दुस्तान स्टील एम्पलाईज यूनियन के अध्यक्ष एस.पी.डे, सहायक महासचिव सविता मालवीय, सचिव अली अकबर के अलावा सीटू सेफ्टी अपेक्स कमिटी के सदस्य कुञ्ज बिहारी मिश्रा एवं जे.के.वर्मा भी उपस्थित थे ।

    सुरक्षा समितियों में मिले कर्मियों को उचित प्रतिनिधित्व -

    उन्होंने हाल ही में बनी सुरक्षा समितियों में कर्मियों से प्रबंधन की अधिक संख्या और प्रबंधन द्वारा तय किए गए कर्मियों के प्रतिनिधि पर सवाल उठाया और प्रबंधन से जानना चाहा कि यह किस तरह से विधिसम्मत है कि कर्मचारियों के प्रतिनिधि प्रबंधन तय करे ।
    ज्ञात हो कि कारखाना अधिनियम 1948 की धारा 41(G) के अनुसार सुरक्षा समितियों में प्रबंधन और कर्मियों के प्रतिनिधियों की संख्या बराबर होनी चाहिए । इसी तरह कारखाना अधिनियम की धारा 41(G) सपठित छत्तीसगढ़ कारखाना नियम 1962 के नियम 73 (I) के अनुसार सुरक्षा समितियों में कर्मियों के प्रतिनिधि कर्मियों द्वारा ही चयन किया जाना चाहिए ।

    सेल की अन्य इकाइयों में अपनाई जाने वाली परिपाटी का भिलाई में हो पालन -

    प्रद्युत मुखर्जी के इस सवाल का प्रबंधन के पास कोई जवाब नहीं था, कि सेल की अन्य इकाइयों में अपनाई जाने वाली परिपाटी का भिलाई में क्यों पालन नहीं हुआ ।
    ज्ञात हो कि सांविधिक प्रावधानों का पालन करने के लिए सेल ( स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड ) की अन्य इकाईयों में कर्मचारियों द्वारा चुने गए युनियन से कर्मचारी प्रतिनिधियों का नाम लिया जाता है । जबकि भिलाई में प्रबंधन द्वारा एक तरफा कर्मियों के प्रतिनिधियों के नाम तय किये गये है, जो विधिक प्रावधानों का उल्लंघन है ।

    संयंत्र के हर विभाग में बने सुरक्षा समिति -

    प्रद्युत मुखर्जी ने यह भी कहा, कि सेल की सभी इकाइयों में स्टील प्लांट को एक फैक्ट्री के रूप में पंजीकृत कराया गया है । जबकि भिलाई में कुल 43 फैक्ट्री पंजीकृत है जिसमें से 26 फैक्ट्रियों में सुरक्षा समिति बनाना कानूनी रूप से अनिवार्य है ।
    सीटू नेता ने कहा कि सेल की अन्य इकाइयों में हर विभाग में सुरक्षा समितियां बनती है। भिलाई में भी पहले हर विभाग में सुरक्षा समितियां थी । यह आश्चर्य की बात है, कि लगातार बढ़ती दुर्घटनाओं के बावजूद प्रबंधन सुरक्षा समितियों को हर विभाग में सक्रिय नहीं कर रही हैं ।

    दुर्घटनाओं में हो रही मौत चिंता का विषय,
    12वी बार प्रधानमंत्री ट्राफी मिलने में बन सकती है बाधा -

    सीटू नेता ने भिलाई इस्पात संयंत्र में लगातार बढ़ रही दुर्घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त की । ज्ञात हो कि प्राणघातक दुर्घटना की संख्या लगातार बढ़ रही हैं 2015 में 5 लोगों ने, 2016 में 12 लोगों ने और 2017 में 5 लोगों ने संयंत्र में हुयी दुर्घटनाओं के कारण अपनी जाने गँवाई ।
    अग्र स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो राष्ट्र का सर्वश्रेष्ठ इस्प्पात संयत्र बने रहने का गौरव भी भिलाई इस्पात संयत्र के पास नहीं रहेगा ।

    व्यवसायिक बीमारियों से बढ़ रही मौत पर ध्यान दें प्रबंधन -

    सीटू नेता ने नौकरी में रहते हुए कर्मियों को हो रही बीमारियों से मौत पर भी अपनी चिंता व्यक्त की । ज्ञात हो कि पिछले कुछ वर्षों से बीमारियों की वजह से होने वाली मौतों की संख्या बढ़ गई है । हर महीने औसतन 12 से 13 मौतें हो रही है ।
    सीटू नेता ने प्रबंधन से मांग की, कि ब्लास्ट फर्नेस, कोक ओवन, सिंटरिंग प्लांट, एसएमएस जैसे विभागों से लगातार भारी मात्रा में डस्ट एवं विषाक्त गैस उत्सर्जन की शिकायत प्राप्त हो रही है ।
    प्रबंधन को यह जांच करनी चाहिए कि कहीं यह उत्सर्जन परिसीमन मानक से अधिक तो नहीं है और इससे कर्मचारी व्यवसायीक बीमारियों के शिकार तो नहीं हो रहे हैं ।

    रिपोर्ट - घनश्याम जी.बैरागी
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