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    छत्तीसगढ़ के मुख्य न्यायाधीश पहुँचे, ग्रामीण अंचल के एक छोटे गांव में :

  • Ghanshyam Bairagi
    Ghanshyam Bairagi
    • Posted on March 11
    छत्तीसगढ़ के मुख्य न्यायाधीश पहुँचे, ग्रामीण अंचल के एक छोटे गांव में :



    विधिक सेवा शिविर में शामिल हुए
    मुख्य न्यायाधीश टी.बी. राधाकृष्णन :

    दुर्ग-भिलाई : 11 मार्च 2018 -
    राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वाधान में विकासखण्ड धमधा के ग्राम पंचायत सेमरिया में विधिक सेवा शिविर का आयोजन किया गया । छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश टी.बी. राधा कृष्णन शिविर में शामिल हुए ।
    मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति टी.बी. राधाकृष्णन ने कहा कि स्कूलों में लीगल लिटेªसी क्लबों की स्थापना विद्यार्थियों में विधिक चेतना जागृत करने के लिए की जा रही है । लीगल लिटेªसी क्लब केवल ज्ञान नहीं देते हैं बल्कि उनके माध्यम से प्राप्त जानकारी को आगे जरूरतमंद तक के पहुंचाने का उत्तरदायित्व आपका है ।
    उन्होंने कहा कि लीगल लिटेªसी क्लब में कम्प्यूटर, किताबें आदि उपलब्ध करायी गई हैं । इसका मतलब यह नहीं है कि आप मशीन की तरह बनो बल्कि आवश्यक है कि दिमाग का भी उपयोग करो । कम्प्यूटर को आपका सेवक होना चाहिए न कि आप कम्प्यूटर का सेवक बनो । आपमें बहुत पावर है, जिसका उपयोग सत्य प्रेम व अहिंसा से करिए । सभी को जानकारी होना चाहिए और आपको अवसर मिला है कि इसके माध्यम से आप लोगों केा जागरूक कर सकें ।
    उन्होंने कहा कि केवल छत्तीसगढ़ी से ही विकास संभव नहीं है अंग्रेजी भी सीखनी चाहिए । मुख्य न्यायाधिपति ने बताया कि पुलिस विभाग एक कार्यक्रम चेतना के नाम से संचालित कर रहा है, जिसके माध्यम से गुड बेड टच की जानकारी दी जाती है । मुख्य न्यायाधीश ने कार्यक्रम में उपस्थित छात्र छात्राओं को शपथ दिलायी कि वे बाल विवाह नहीं होने देंगे, अगर होते देखेंगे तो पहले इसकी खबर महिला एवं बाल विकास विभाग को देंगे । खुद का बाल विवाह भी नहीं होने देंगे तथा इसकी भी खबर देंगे ।
    शिविर को सम्बोधित करते हुए न्यायाधीश उच्च न्यायालय प्रीतिंकर दिवाकर ने कहा कि आम लोगों को कानून की जानकारी देने के लिए यहां विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया जाता है । यहाँ विधिक साक्षरता क्लब का शुभारंभ किया गया । यह एक तरह से नई तरकीब है । इससे सभी लोगों तक कानून को पहुंचाने और उनकी मदद करने में सहायता करेगा ।
    उन्होंने कहा कि जरूरतमंद लोगों तक कानून को पहुंचाने और उसकी सहायता करने के लिए राज्य व केन्द्र द्वारा विधिक सेवा प्राधिकरण के तहत कार्य किया जा रहा है । उन्होंने कहा कि बालिकाओं को कानून का ज्ञान होने से उसके परिवार के सभी लोगों को कानून का ज्ञान रखने में मदद मिलता है । विधिक सेवा क्लब के लिए इस विद्यालय का चयन किया गया है । निश्चित रूप से इस विद्यालय की शिक्षक और छात्राएं विधिक सेवा प्राधिकरण की अपेक्षाएं को तत्परता के साथ पूरा करेंगी ।
    उन्होंने कहा कि इस विद्यालय की बालिकाओं को प्राधिकरण का सदस्य बनाया गया है । विद्यालय में कानून की किताब उपलब्ध कराई गई है, जिससे यहां की छात्र-छात्राएं अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन और विधिक पुस्तकों का अध्ययन कर कानून की बारीकों को समझ सकेंगी । समय-समय पर न्यायाधीशों के द्वारा कानून की जानकारी दी जाएगी ।
    उन्होंने बालिकाओं को सामाजिक कुप्रथा की घटना घटित होने पर इसे रोकने के लिए आगे आने प्रेरित किया । कन्या भू्रण हत्या, बाल विवाह, दहेज प्रथा जैसे सामाजिक अभिशाप को खत्म करने में बेटियों को पूरी तत्परता के साथ आगे आकर पीड़ित और जरूरमंद लागों की मदद करने कहा ।
    उन्होंने कहा कि शासन लोगों के कल्याण के लिए अनेक प्रकार की कल्याणकारी योजनाएं बनाती है । इन योजनाओं का लाभ लेने की सही जानकारी नहीं होने से जरूरतमंद लोगों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है । ऐसे स्थिति में विधिक सहायता शिविर के माध्यम से लोगों को योजनाओं की जानकारी देने के साथ ही लाभान्वित करने का प्रयास भी किया जाता है । विधिक साक्षरता क्लब से जुड़े सदस्यों को अपनी भागीदारी देकर लोगों की मदद करने कहा ।
    दुर्ग जिला एवं सत्र न्यायाधीश आर.के. अग्रवाल ने कहा कि विधिक साक्षरता शिविर का उद्देश्य न्याय की पहुंच सभी लोगों तक पहुंचाना है । आम नागरिकों को विधि के संबंध में जागरूक करना, जानकारी देना और उनकी सहायता करना इसका उद्देश्य है । उन्होंने कहा कि विधिक सेवा प्राधिकरण जरूरतमंद लोगों की सहायता करने के लिए सतत् कार्यरत् है । उन्होंने कानूनी रूप से जागरूक समाज का निर्माण करने और सशक्त व मजबूत भारत का निर्माण करने के लिए लोगों को जागरूक होकर अपने अधिकारों व कत्र्तव्यों को समझने कहा।

    रिपोर्ट - घनश्याम जी.वैष्णव बैरागी
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